Health

Soil obtained natural medicine.

Soil obtained natural medicine.

मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें अपने शरीर को स्वस्थ रखे

दोस्तो आज हम बात कर रहे मिट्टी के बर्तनों की इसके लिए पहले तो हमे यह जानना होगा की मिट्टी कितने प्रकार कि होती हैं ओर किस प्रकार की मिट्टी से बने बर्तन खाना बनाने के लिए काम मे आते हैं।

मिट्टी के प्रकार।

मिट्टी के प्रकारकाली मिट्टी, पीली मिट्टी, लाल मिट्टी और सफेद मिट्टी। हालांकि हर प्रकार की मिट्टी की अपनी अलग पहचान विशेषता है, पर हम सिर्फ बर्तनों की बात कर रहे हैं तो लाल मिट्टी पीली मिट्टी की ही बात करेंगे क्योंकि पीली और लाल मिट्टी  से बर्तन बनाने में विशेष रूप से काम मे ली जाती हैं इसके अलावा काली मिट्टी के भी बर्तन बनाये जाते हैं।

मिट्टी के बर्तनों की विशेषता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण।

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, मिट्टी में कई गुण पाए जाते हैं। अधिकांश धातुएं मिट्टी में ही पाई जाती हैं। जब हम मिट्टी के बर्तन में खाना खाते हैं तो अनेक पोषक तत्व जैसे जिंक, मैग्नीशियम, आयरन हमारे शरीर में आते हैं। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं: आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरेधीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है मिट्टी में अनेकों प्रकार के विटामिन्स, खनिज, धातु रस इत्यादि होते हैं जो इसे औषधिय गुणों से परिपूर्ण बनाते हैं। हमारे प्राचीन ऋषिमुनियों ने भी मिट्टी की महिमा का गुणगान किया है। काली मिट्टी चिकनी और काले रंग की होती है, इसे लगाने से ठंडक मिलती है, विष प्रभावित स्थान पर तुरंत काली मिट्टी का लेप लगाने से फायदा होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में भी मिट्टी का उपयोग किया जाता है

इतिहास

भारतीय संस्कृति के हजारों वर्षों पुराना इतिहास को अगर खोजने से पता चलता है कि शुरूआत में मिट्टी के बर्तनों का उपयोग सर्वोपरी था। धातु के बर्तन का ज्ञान उस समय नहीं था। वेदों व शास्त्रों में भी मिट्टी का बर्तनों का उपयोग स्वास्थ्य के लिए अच्छा बताया गया है। जब पाश्चातय संस्कृति को भाषा का ज्ञान नहीं था समय भारत में वेदों व शास्त्रों की रचना हो चुकी थी। हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो सभ्यताओं के अवशेषों में मिट्टी के बर्तन मिले है।

लगभग 200 वर्ष पूर्व मिट्टी के बर्तनों के उपयोग प्रचलन से धीरेधीरे जाने लगा क्योंकि एल्युमीनियम के बर्तनों ने इसकी जगह लेनी शुरु कर दी।  

रखरखाव की विधि।

लोग मिट्टी के बर्तन काम मे लेने से कतराते हैं क्यों कि मिट्टी के बर्तनों की देखरेख सफाई मुश्किल होती है। मिट्टी के बर्तनों को धोना बहुत ही आसान है। इसके लिए आपको कोई केमिकल युक्त साबुन, पाउडर या लिक्विड का इस्तेमाल नहीं करना। आप बर्तनों को केवल गरम पानी से धो सकते हैं। चिकनाई वाले बर्तनों में ज्यादा से ज्यादा आप पानी में नीबू निचोड़ कर डाल दें तो बर्तन बिल्कुल साफ हो जाते है। नारियल की बाहरी छाल यानी नारियल के जूट से बर्तन साफ कर लें।

पुनः हम आयुर्वेदिक जीवन शैली की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मिट्टी के बर्तन भी इसका एक जरुरी भाग है, तो आइए हम आज से ही एक नई शुरुआत करते हैं मिट्टी के बर्तन में खाने की प्रथा को पुनर्जीवित करते हैं।

Use a clay pot to keep your body healthy!

Friends, today we are talking about pottery. first, we have to know how the soil is and what type of clay appliances are used for cooking.

Types of soil.

Soil Type – Black soil, yellow soil, red soil, and white soil. Although each type of soil has its own distinct identity and specialty. we will only talk about red clay and yellow clay because yellow and red clay are specially used in making utensils. Apart from this, utensils of black clay are also beneficial.

Characterization and scientific view of pottery.

Cooking in pottery furnishes such nutrients, many properties are found in soil. Many nutrients like zinc, magnesium, iron are given clay Potter. Modern science has now proved that cooking in pottery cures many diseases in our body: According to Ayurveda, if food is to be made nutritious and tasty, it should be cooked slowly. Even though the time is taken to cook food in the pottery takes a little longer, but it gives full wealth to health. Our ancient sages have also praised the glory of the soil. Black soil is smooth and it gets cool by applying it, applying black soil coating on the poison affected area is beneficial. Soil is also obtained in natural medicine.

History

The discovery of thousands of years old history of Indian culture suggests that the use of pottery, in the beginning, was universal. There was no knowledge of metal utensils at that time. The use of pottery is also said to be good for health in the Vedas and scriptures. When the Western culture did not know the language, Vedas and scriptures were composed in India at the time. Pottery has been found in the remains of harappa and mohenjo daro civilizations.

The use of pottery began to go slowly around 200 years ago as aluminum utensils started replacing it.

Method of maintenance.

People are reluctant to use earthen utensils because it is difficult to maintain and clean the pottery. It is very easy to wash the pottery. For this, you do not have to use any chemical-rich soap, powder or liquid. You can only wash appliances with hot water. In lubricating appliances, as much as you add lemon to the water, the utensils become clean. Clean the utensils with coconut outer bark.

Again we are moving towards Ayurveda lifestyle. Pottery is also an important part of it, so let us make a new beginning from today and revive the practice of eating in an earthen pot.

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