History

Rani ki Vav on 100 Rupees note.

Rani ki Vav At 100 Rupees note.

भारत सरकार द्वारा 100 रूपए का नोट जुलाई 2018 में जारी किया गया। नोट के पिछले हिस्से में प्राचीन इमारत “रानी की वाव” का चित्र मुद्रित किया गया है।

यह इमारत कहां है?

किस वजह से इसका चित्र 100 रूपए के नोट पर दिया गया है? आइए इस बारे में चर्चा करते हैं।

“रानी की वाव” गुजरात के पाटन शहर मैं है। पाटन गुजरात की भूतपूर्व राजधानी मानी जाती थी। पाटन को पहले अन्हिलपुर  के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1022 के समय गुजरात में राजा भीमदेव सोलंकी शासन करते थे। राजा भीमदेव सोलंकी की मृत्यु पश्चात गुजरात के पाटन शहर में रानी की वाव अर्थात बावड़ी का निर्माण करवाया गया। कहा जाता है कि राजा भीमदेव की प्रेमिल स्मृति में उनकी विधवा रानी उदयामति ने इस बावड़ी का निर्माण किया। जिसे बाद में करणदेव प्रथम इसे ने पूरा किया। यह बावडी पहले सात मंजिला हुआ करती थी मगर दो मंजिल नष्ट हो जाने के कारण इसमें सिर्फ पांच मंजिल ही दिखाई पड़ती है। बावड़ी 64 मीटर लंबी, 20 मीटर चौड़ी और 27 मीटर गहरी है। ऐसा कहा जाता है कि बावड़ी में 30 किलोमीटर लंबी सुरंग है जो सिद्धपुर में जाकर खुलती है।

पाटन की इस बेमिसाल इमारत को 22 जून 2014 में यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल  में लिया गया। यह बावड़ी वास्तुकला और मूर्तियों का संग्रहालय हैं। वाव के स्तंभों पर मुख्य रुप से वामन,महिषासुरमर्दिनि, राम, शिव व विष्णु जैसे कई देवी देवताओं की मूर्तियां एंव बहुत खूबसूरत नक्काशीयां देखी जा सकती है। यह सात मंजिला वाव मारू गुर्जर शैली का उत्कृष्ट व अमूल्य उदाहरण है। सरस्वती नदी के विलुप्त हो जाने के कारण यह वाव 700 वर्षों तक मिट्टी मे दबी हुई थी। भारतीय पुरातत्व विभाग के द्वारा इस बावडी को पुनः खोजा गया और इसकी खुदाई की गई।

यह धारणा प्रचलित है कि प्राचीन भारतीयों में इतिहास चेतना नहीं थी। इस कारण उन्होंने कभी इतिहास नहीं लिखा किंतु यह सत्य है कि भारत में प्राचीन काल में इतिहास भी शिक्षा का अंग था। भारत में ऐतिहासिक घटनाएं अपने आप में महत्वपूर्ण मानी जाती थी। ऐसी घटनाएं स्मृति के रूप में परिवर्तित पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत होती थी। इन्हें इतिहास के रूप में संकलित किया जाता था। भारतीय इतिहास के स्त्रोत के रूप में प्राचीन स्मारकों का अपना निजी महत्व है। ऐतिहासिक युग में कहीं से भी प्रसादाओं के अवशेष मिले हैं। भारतीय स्मारकों में अधिकांश से धार्मिक स्मारकों के अवशेष मिलते हैं जिसमें स्तूप, बिहार, क्षेत्रीय, मंदिर, बावड़िया और तालाब आदि प्रमुख हैं।

 

100 Rupees note published by the government of India in July 2018. The picture of the ancient building “Rani ki vav” has been printed in the back of the note.
Where is this building?
For what purposes has this picture been given on a 100 rupee note? Let’s talk about this.
” Rani ki vav” is the Patan city of Gujarat. Patan was considered to be the former capital of Gujarat. Patan was first known as Anhilpur. In the year 1022, Raja Bhimdev Solanki  (also known as the Chalukyas) ruled in Gujarat. After the passing of King Bhimdev Solanki, the Rani ki Vav was constructed in Patan city of Gujarat. It is said that in the concerted souvenir of King Bhimdev, his widow, Rani Udayamati, created this stepwell. Which was later completed by Karandev First. This stepwell used to be the first seven storeys, but due to the destruction of two floors, only five floors are seen. stepwell is 64 meters long, 20 meters wide and 27 meters deep. It is said that there is a 30-kilometre long tunnel in stepwell which opens in Siddhpur.
This unmatched building of Patan was taken in the UNESCO World Heritage Site on June 22, 2014. This is the architecture of stepwell and the Museum of Statues. On the pillars of the stepwell, mainly statues of many deities, such as Vaman, Mahishasuramardini, Ram, Shiva and Vishnu and very beautiful carvings can be seen. This seven-storey Vaav is an excellent and priceless example of the Maru Gurjar genre. Due to the extinction of Saraswati river, this was buried in soil for 700 years. This stepwell was researched and excavated by the Indian Archeology Department.
It is prevalent in the belief that ancient Indians did not have history consciousness. For this reason, he has never written history, but it is true that in ancient times, history was also a part of education in India. Historical events in India were considered important in itself. Such incidents were the source of inspiration for generations converted into memory. These were compiled as history. Ancient monuments have their own importance as the source of Indian history. In the historical era, there have been remnants of Prasadas from anywhere. Most of the Indian monuments receive remnants of religious monuments, which include Stupa, Regional, Temple, stepwell and Ponds.
Like
Like Love Haha Wow Sad Angry
1

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close