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Karni Mata Panorama Deshnok.

Karni Mata Panorama Deshnok.

भारतीय संस्कृति अपने आप में कई साक्ष्य समेटे हुए हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार समय-समय पर अलौकिक शक्ति इस धरती पर अवतार लेती है। श्री करणी जी का जन्म विक्रम संवत् 1444 आश्विन शुक्ल 7 शुक्रवार तदनुसार दिनांक 20 सितम्बर , 1387 को फलौदी ( जोधपुर ) के पास सुव्वाप ग्राम में चारण कुल में मेहाजी किनिया व देवल बाई की छठी पुत्री के रूप में हुआ जिनका नाम रिधु बाई रखा गया।

श्रद्धालुओं का मानना है कि करणी माता साक्षात मां जगदंबा का अवतार थी। करणी मां के संबंध में बहुत सारी चमत्कारी घटनाएं बताई जाती है। हर चमत्कारी घटना उनकी उम्र के अलग-अलग पड़ाव से संबंध रखती थी।

पिता को जीवनदान देना।

वि. सं. 1450 (1393 ई.) को वर्षा ऋतु में मेहाजी अपने खेत से वापस लौट रहे थे, रास्ते मे अंधेरा होने के कारण उनका पैर काले सांप के फन पर पड़ा ओर सांप ने डस लिया। गावँ के लोग मेहा जी को घर ले आए। करणी जी अपने पिता के समक्ष बैठकर सांप के दंश की जगह हाथ रख  के कहा कि “ उठो पिता जी आप खेत से घर आ गये है।“ मेहाजी के शरीर से विष पल भर में उतर गया और वे तत्काल उठ खड़े हुए।

वि. सं. १४७३ (१४१६ ई.) आषाढ़ शुक्ल नवमी को श्री करणी जी का विवाह 29 की आयु में केलू जी बेठू के पुत्र देपा जी बैठू के साथ हिन्दू रीति रिवाज के साथ से सम्पन्न हुआ।

श्री नेहड़ीजी मन्दिर स्थापना।

साटिका से चलकर सूर्यास्त के समय श्री करणी जी गोधन के साथ जिस स्थान पर पहुंचे वहाँ विलौना करने के दौरान दही के छींटे लगने से वह सूखी लकड़ी खेजड़ी का हरा वृक्ष बन गई, जो कि आज भी मौजूद है। (वर्तमान में यह मन्दिर श्री करणी जी मन्दिर देशनोक से 2 कि. मी. दूर पश्चिम की तरफ स्थित है।)

देशनोक नगर की स्थापना।

राव रिड़मल को श्री करणी जी ने जांगल का राजा बना दिया तब उसने श्री करणी जी को भेट स्वरूप आधा राज्य भेंट करना चाहा , जिसे श्री करणी जी ने अस्वीकार कर दिया एवं अत्यधिक आग्रह पर 10 गांवों की भूमि के क्षेत्र में चरागाह भूमि को स्वीकार किया। वि. सं. 1476 (1419 ई .) वैशाख शुक्ल द्वितीया, शनिवार को श्री करणी जी ने अपनी ढाणी से एक कोस पूर्व में देशनोक गांव का शिलान्यास किया। श्री करणी जी ने कहा कि यह गांव दस गांवों की नाक है , इसलिए इसका नाम मैं देशनाक रखती हूं। यहीं गांव आगे चलकर देशनोक बन गया।

जोधपुर नगर एवं दुर्ग की स्थापना।

श्री करणी जी के वरदान से वि. सं. 1510 (1453 ई.) में मंडोवर पर पुनः राठौड़ों का अधिकार स्थापित हो गया। जब 5 वर्ष में राज्य अच्छी तरह स्थापित गया तो जोधा ने, मंडोवर से 5 मील की दूरी पर किले की आधारशिला श्री करणी जी से ही रखवाने का मन्तव्य बनाया। श्री राव जोधा ने गांव चौपासनी तक पग मण्डणा बिछाकर उनका स्वागत किया और वि. स. 1515 (1459 ई.) ज्येष्ठ सुदी ग्यारस शनिवार को वर्तमान मेहरानगढ की नींव अपने हाथ से रखी।

बीकानेर की स्थापना।

जोधपुर के महाराजा राव जोधा जी के पुत्र बीका जी अपने काका कांधल जी के साथ श्री करणी माता जी के दर्शनार्थ एवं आशीर्वाद प्राप्त करने देशनोक में उपस्थित हुये। श्री करणी जी महाराज ने राव बीका जी की प्रार्थना पर बीकानेर दुर्ग का शिलान्यास किया। बिकानेर राज परिवार वंश परम्परा से श्री करणी जी के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखते आये हैं।

 

वि. सं. 1511 (1454 ई.) को श्री करणी जी के पति देपा जी का देशनोक में स्वर्गवास हो गया। श्री करणी जी ने सामाजिक परम्परा के अनुसार अपनी अंगिया और लाल रंग की लोहड़ी उतार कर उसके स्थान पर कत्थई रंग की लम्बी बाह की अंगरखी और उसकी रंग की लोवड़ी धारण की। इस तरह श्री करणी जी ने 84 वर्ष तक वैधव्य जीवन व्यतीत किया ।

वि. सं. 1595 दिनांक 23 मार्च  1538 को श्री करणी मां 151 साल की उम्र में ज्योतिर्लिन हुई।

इस खूबसूरत भारतीय इतिहास को भारतीय जनता पार्टी के द्वारा एक स्थान पर समेटा गया है। श्री करणी माता के मंदिर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर करणी माता पैनोरमा निर्माण किया गया। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 35 लाख की लागत से तैयार सभागार तथा  सीईएससी लिमिटेड कोलकाता द्वारा 50 लाख की लागत से करणी मां की गनमेटल प्रतिमा का अनावरण किया। पेनोरमा का निर्माण राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत की देखरेख में हुआ है। उनका कहना है कि इस पेनोरमा को साफ व सुरक्षित हमारी जिम्मेदारी है व युवा पीढ़ी को प्रदेश के इतिहास, महापुरुषों एवं लोक देवताओं का इतिहास को जानना बहुत आवश्यक है।

करणी माता के पेनोरमा में उस समय के भारतीय इतिहास और समग्र रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है पनोरमा में मूर्तियां और चित्रों के जरिए इतिहास को बहुत ही खूबसूरत व नायाब तरीके से दर्शाया गया है। पेनोरमा को देखने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा मात्र 10 रुपये का टिकट जारी किया गया है। पैनोरामा को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ लगी रहती है। राजस्थान के अलावा अन्य राज्यो व बाहर के देशों से भी लोग भ्रमण करने को आते है। इतने शानदार इतिहास को एक ही छत के नीचे देख कर लोग का उत्साह देखा जा सकता है।

 

Indian culture boasts much evidence in itself. According to the beliefs of the Hindu religion, supernatural power takes place on this earth from time to time. Shri Karani Ji was born on 20 September 1387, in Suvvap village near Phalodi (Jodhpur) in charan family, in the house of Meha ji Kienia and Deval baai, whose name was Ridhu Bai.

The devotees believe that the Karni ji was a real incarnation of Jagdamba. A lot of miraculous incidents are reported in connection with Karani’s. Every miracle event was related to the different stages of their age.

Gave life to father.

Meyhaji was returning from his farm and snakebite. Karani Ji sat near her father and kept her hand in the place of a snake bite. Meha Ji stood up immediately.

in 1416 Karanji Ji married with Deppa Ji, son of Kelu Ji Bethu.

Sri Nehari Ji Temple Establishment.

In the place where Karani Ji reached with the cow, due to the splash of curd it became a green tree of dry wood, which is still present today. At present, this temple is Located in west side 2 km from Sri Karani Ji temple Deshnok.

Establishment of Deshnok.

On 1419, Rao Ridmal was made King of Jangal, then he wanted to give half kingdom as a gift to Shri Karani Ji. On high urgency, Karni Ji Accepted grazing land in the area of land of 10 villages. In 1419, Shri Karani Ji laid the foundation of Deshnok village in the east.

 

Establishment of Jodhpur and Mehrangarh Fort.

In 1459 Shri Karani Ji laid the foundations of Jodhpur and Mehrangarh Fort.

Establishment of Bikaner.

Rao Bika son of Maharaja Rao Jodha king of Jodhpur, came to receive the blessings of Shri Karani Mata Ji. Shri Karani Ji Maharaj laid the foundation of Bikaner fort on the request of Rao Bika. Bikaner Royal family has been showing great reverence for the Karani Ji from many Clans.

In 1454, Karani ji’s husband, Devpa ji, passed away in Deshonok. Karani Ji spent the life of widow for 84 years.

With her stepson, Poonjar and some other followers, kanri Ji was in Bikaner district, it said that Karni Ji disappeared at the age of 151.

This beautiful Indian history has been consolidated by the Bharatiya Janata Party. Karani Mata Panorama was constructed about two kilometres from Shri Karani Mata temple. Former Chief Minister of Rajasthan, Vasundhara Raje unveiled a Gunmetal statue of Karni Mata and Auditorium, it took a total of 85 million rupees. 35 lacs rupees paid by the government and 50 lacs rupees paid by CESC Limited, Kolkata.

Panorama has been built under the supervision of Omkar Singh Shekhawat, president of the Rajasthan Heritage Conservation and Promotion Authority. They say that this panorama is our responsibility to be clear and secure and it is very important for the younger generation to know the history of the state, history of great men and folk deities.

An attempt has been made to present the Indian history and the entirety of that time in Panorama of Karani Mata, through the sculptures and paintings in Panorama, history is depicted in a very beautiful and unsurpassed manner. To see Panorama, a ticket of only Rs 10 has been issued by the Rajasthan government.

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