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History of Rakhi festival.

History of Rakhi festival.

नमस्कार दोस्तों,
भारत वर्ष में में सभी त्योहारों की तरह राखी भी हिंदुओं का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार श्रावण महीने के अंत में पूर्णिमा के दिन आता है। रक्षाबंधन के दिन आप सभी को पता है, कि बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन लेता है। पर यह कहानी, यह प्रथाएं जो है, भाई बहन का जो रिश्ता है कई सालों से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे स्थानांतरित किया जाता है। पर असल में राखी का त्यौहार में राखी का त्यौहार क्यों मनाया गया? इसकी शुरुआत किसने की? यह काफी रोचक तथ्य हर कोई सोचता है और उसे जानने की कोशिश बहुत कम लोग करते हैं। बस यही ध्यान रहता है कि बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई इसके बदले में पूरी जिंदगी अपनी बहन की रक्षा करने का वचन लेता है। आज हम इस बारे में बात करेंगे कि राखी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?

भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी।

एक कहानी महाभारत के काल से प्रचलित है। मकर सक्रांति के दिन भगवान कृष्ण उनकी पत्नी रुक्मणी यज्ञ में बैठे थे। शिशुपाल द्वारा भगवान कृष्ण का अपमान करने पर भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध कर दिया। सुदर्शन चक्र के लौटने पर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई और रक्त बहने लगा। रानी रुक्मणी ने अपनी दासी को दवाई लाने को भेजा। उस वक्त द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कुछ किनारा फाड़ कर भगवान कृष्ण की उंगली पर बांध दिया, ताकि बहता हुआ खून रुक जाए। इसके बदले में भगवान कृष्ण ने उनको यह वचन दिया कि, मैं हर वक्त तुम्हारी रक्षा करूंगा और जब भी तुम्हें मेरी आवश्यकता हो मुझे याद याद करना। मैं तुम्हारी रक्षा के लिए हर समय तत्पर रहूंगा। जब द्रोपदी का चीर हरण हो रहा था। कौरवों के द्वारा द्रोपदी का अपमान किया गया। द्रौपदी ने अपने भाई कृष्ण को याद किया तो भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई और अपने भाई होने का फर्ज निभाया।

रानी कर्णावती और हुमायूं।

भारत के इतिहास में यह किस्सा 1500 शताब्दी का है। जब चित्तौड़गढ़ पर बहादुर शाह द्वारा हमला किया जाता है। रानी कर्णावती का पुत्र विक्रमजीत चित्तौड़गढ़ की रक्षा करने में असहाय साबित होता है। रानी कर्णावती हुमायूं को रक्षा सूत्र भेजती भेजती है।  हुमायूं द्वारा रक्षा सूत्र प्राप्त होने पर हुमायूं तुरंत ही पलायन कर लेता है। मगर ग्वालियर पहुंचते ही हुमायूं को बहादुर शाह का पत्र मिलता है और उस पत्र में ऐसा जिक्र रहता है कि वह केवल काफिरों के खिलाफ ज़िहाद कर रहा है, तो हुमायूं यह बात सुनकर आगरा लौट जाता है।हुमायूं रानी कर्णावती की सहायता करने में असक्षम होता है। बहादुर शाह द्वारा चित्तौड़गढ़ को हासिल कर लिया जाता है।

सिकंदर और पौरूस।

326 ईस्वी में भारत भारत पर सिकंदर ने हमला किया था। उस वक्त भारत में पौरूस का राज था। पौरूस काफी बलशाली राजा था।सिकंदर की पत्नी ने पौरूस को रक्षा सूत्र भेजते हुए यह निवेदन किया, कि वह सिकंदर को युद्ध में किसी तरह का नुकसान ना पहुंचाए। राखी का मान रखते हुए, पौरूस ने सिकंदर पर वार नहीं किया। इस पर सिकंदर ने खुश होकर पुरुष को उसका राज्य वापस लौटा दिया।

 

Hello friends,
Like all the festivals in India, Rakhi is also celebrated with great fanfare. This festival comes on the day of full moon in the month of Shravan. On the day of Rakshabandhan, all of you know that sister ties a rakhi on her brother’s wrist and the brother takes a pledge to protect his sister. But these practices, which is the relation of brother Sister, has been moving for generations to generations. But in reality why was the festival of Rakhi was celebrated. Nobody starts thinking about this interesting fact of who started it and few people try to know it. Just remember that sister builds a rakhi on her brother’s wrist, and the brother takes a pledge to protect her sister in return for her whole life. Today we will talk about why the festival of Rakhi is celebrated?

Lord Krishna and Draupadi.

A story is prevalent in the times of Mahabharata. On the day of Makar Sankranti, Lord Krishna was sitting in worship with his wife Rukmani. Lord Krishna was insulted by Shishupal. Krishna killed Sishupal by Sudarshan Chakra. On the return of Sudarshan Chakra, Lord Krishna’s finger was cut and blood started flowing, Rani Rukmani sent her maid to the medicine. At that time Draupadi tore away some part of his sari and tied it to Lord Krishna’s finger, so that the flowing blood stopped, Lord Krishna gave him this promise that, I will protect you all the time and whenever I need you to remember me. I will be looking forward to protecting you all the time. When the Kauravas tried to humiliate Draupadi, Draupadi remembered his brother Krishna, Lord Krishna saved Draupadi’s shame and acted as his brother.

Rani karnavati and Humayun.

The anecdote is in the history of the 1500 century. Chittorgarh is attacked by Bahadur Shah. Vikramjeet, son of Rani karnavati, proves helpless in defending Chittorgarh. where the Queen of Chittorgarh sends rakhi to Humayun.In this story. When Humayun gets the rakhi. Humayun leaves for Chittor. But, as soon as Gwalior arrives, the letter of Bahadur Shah is received and Humayun receives a letter saying that he is only fighting against the infidels, then Humayun, after hearing this, returns to the Agra. Rani Karnavati was unable to save Chittaurgarh.Chittorgarh was subordinated by Bahadur Shah Zafar.

Alexander and Porus.

Alexander attacked India in 326 AD. At that time there was the reign of Porus in India. Porus was a very powerful king. Alexander’s wife sent a rakhi and requested, that please do not cause any kind of damage to Alexander in the war, then keeping the value of Rakhi, did not kill Alexander. On this, Alexander returned the kingdom to pours.
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