History

Bappa Rawal panorama.

Bappa Rawal panorama.

बप्पा रावल पैनोरामा।

राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण, राजस्थान सरकार द्वारा उदयपुर जिले के मठाठा में बनाए गए बप्पा रावल पनोरमा का माननीया मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे जी द्वारा लोकार्पण 11 अगस्त 2018 मावली में सार्वजनिक समारोह में किया गया। महापुरुषों, सन्त-महात्माओं और लोकदेवताओं के जीवन, शिक्षा-उपदेशों, उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से जन सामान्य को रूबरू कराने के लिए प्राधिकरण द्वारा बनाए गए पनोरमा की कड़ी में आज नौवें पनोरमा का लोकार्पण हुआ।
राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह जी लखावत के मार्गदर्शन एवं प्रमुख शासन सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग श्री कुलदीप रांका के निर्देशन में बनाया गया है।
प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीकम बोहरा ने इस पेनोरमा की पटकथा लेखन और डिस्प्ले प्लान बनाने का कार्य किया। प्राधिकरण के सदस्य श्री कंवल प्रकाश जी किशनानी के परामर्श से अजमेर के जमाल ने पनोरमा में डिस्प्ले का कार्य किया। पनोरमा भवन का निर्माण कार्य प्राधिकरण के अधिशाषी अभियन्ता श्री सुरेश स्वामी के निर्देशन में सहायक अभियन्ता श्री सोहन लाल प्रजापति द्वारा कराया गया। इस पनोरमा में 2 डी फ़ाइबर पेनल 3 डी फ़ाइबर मूर्तियाँ बनायी गयी है।
इस अवसर पर टीकम बोहरा अनजाना द्वारा पन्नाधाय की जीवनी पर लिखी काव्य-पुस्तिका “महाबलिदानी पन्नाधाय” की प्रथम प्रति माननीया मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे जी को भेंट की।
हमारी गौरवशाली विरासत को प्रेरणादायी तरीक़े से प्रस्तुत करने के लिए प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे पनोरमा निर्माण के प्रयासों को माननीया मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे जी द्वारा सरहाते हुए हौसला अफ़्जाई की और हमारे गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

बप्पा रावल का इतिहास।

मेवाड़ के राजपूतों की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। मेवाड़ के राजपूतों के शोर्य की गाथा पूरी दुनीया में कही जाती है। आज हम राजस्थान के उस वीर योद्धा के बारे में बात करेंगे जिसने बड़े से बड़े सूरमाओं को अपने आगे झुका दिया।
चित्तौड़ के महाराजा राजा बप्पा रावल सिंह का जन्म 713 से 714 ईसवी में माना जाता है। बप्पा रावल को जन्म से “काल भोज” नाम से जाना जाता था। इनके जन्म के समय चित्तौड़गढ़ में मान मोरी नामक मौर्य शासक का राज था। 734  ईसवी मे 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने चित्तौड़गढ़ के दुर्ग पर आक्रमण करके उसको अपने अधीन कर लिया।
वैसे तो गुहिलादित्य/गुहिल को गुहिल वंश का संस्थापक कहते हैं, पर गुहिल वंश का वास्तविक संस्थापक बप्पा रावल को माना जाता है। ऐसा माना जाता है पाकिस्तान में रावलपिंडी शहर का नाम बप्पा रावल के नाम से रखा गया था।
उदयपुर के उत्तर में कैलाशपुरी में स्थित एकलिंग जी का मन्दिर इस मन्दिर का निर्माण 734 ई. में बप्पा रावल  के द्वारा करवाया गया | इसके निकट हारीत ऋषि का आश्रम शोभावान है।
बप्पा रावल  के द्वारा एकलिंग जी के मन्दिर के पीछे आदी वराह मन्दिर का निर्माण कराया गया।
735 ई. में मुगल शासक हज्जात ने राजपूतों से लोहा लेने के लिए अपनी फौज भेजी, मगर बप्पा रावल ने हज्जात की फौज को हज्जात के मुल्क तक खदेड़ दिया।
ऐसा कहा जाता है कि बप्पा रावल की तकरीबन 100 पत्नियाँ थीं, जिनमें से 35 मुस्लिम शासकों की बेटियाँ थीं, जिन्हें इन शासकों ने बप्पा रावल के भय से उनके साथ विवाह किया गया।
738 ई. में अरब आक्रमणकारियों से युद्ध- यह युद्ध वर्तमान राजस्थान की सीमा के भीतर हुआ बप्पा रावल, प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम व चालुक्य शासक विक्रमादित्य द्वितीय की सम्मिलित सेना ने अल हकम बिन अलावा, तामीम बिन जैद अल उतबी व जुनैद बिन अब्दुलरहमान अल मुरी की सम्मिलित सेना को पराजित किया।
बप्पा रावल ने सिंधु के मुहम्मद बिन कासिम और गज़नी के शासक सलीम को पराजित किया। अपनी राजधानी नागदा बनाई।
बप्पा रावल का शासनकाल 19 वर्षों का था। 39 वर्ष की आयु में सन्यास लिया। उन्होंने 97 साल की आयु में अपना देह त्याग दिया और उनकी समाधि का स्थान एकलिंग पूरी में आज भी स्थित है।

शिलालेखों में वर्णन –

कुम्भलगढ़,आबू और कीर्ति स्तम्भ शिलालेख में राजा बप्पा रावल का उल्लेख सातवीं शताब्दी की लिपि में  देखा जा सकता है।
8 वीं शताब्दी मे कर्नल जेम्स टॉड को कुछ शिलालेखों में से एक शिलालेख मिला जिसमें मानमोरी को पराजित करने का वर्णन किया गया है, चित्तौड़गढ़ को हासिल किया था। कर्नल जेम्स टॉड ने उस शिलालेख को समुद्र में फेंक दिया।

 

Bappa Rawal Panorama.

Rajasthan Heritage Conservation and Promotion Authority, Rajasthan government inaugurated Bappa Rawal Panorama, made in the Mathatha in Udaipur district by the Honorable Chief Minister Vasundhara Raje at a public function in Mavali today.
The panorama has been opened to publicize the lives of the great Gods, saints, kings and their personality. This Panorama has been created under the guidance of Shri Onkar Singh Lakhawat, Chairman of Rajasthan Heritage Conservation and Promotion Authority and under the direction of Chief Minister. Directed by Mr Kuldeep Ranka, Secretary of Arts and Culture.
Chief Executive Officer Tikam Chand Bohra has done the script of writing and display plan of this panorama. Honourable Chief Minister Vasundhara Raje said that glorious history of our Rajasthan is presenting in the more inspirational way.

Bappa Rawal history.

Rajputs are famous all over the world.
It said that the Great King of Rajasthan, It is said that Maharana Bappa Raval Singh of Chittor, the great king of Rajasthan, was born in 713 to 714 AD. Bappa Rawal birth name was Kal bhoj. At the time of bappa’s birth, Maurya was ruled in Chittor. At the age of 20 in 734, Bappa attacked Chittor fort and took it under his control. Ekling Ji Temple at Kailash Puri, north of Udaipur, was constructed in 734 AD by Bappa Rawal. There is also the ashram of the Harit rishi near that place.
The Adi Varah Temple was built by Bappa Rawal after the Ekling Ji temple.
In 735, Mughal ruler Hajjat sent his army to fight against the Rajputs, but Bappa Rawal defeated Hajjar’s army and sent him back.
It is said that there were 100 wives of Bappa Raval, of which 35 were the daughters of Muslim rulers, those rulers, Due to the fear of Bappa Raval, they married their daughters with Bappa Rawal. In 738 Bappa Rawal defeated them by fighting the Arab king. Bappa Rawal defeated Mohammad bin Qasim of Sindh, Salim ruler of Ghazni and made his capital in Nagda.
Bappa Rawal’s rule was 19 years old. He took the retirement at the age of 39, and died at 97 years of age and, The place of his tomb is still located in eklingpuri.

 

Bappa Rawal mentions in inscriptions.

In the inscriptions of Kumbhalgarh, Abu and Kirti stambh, King Bappa Rawal can be mention in the script of the seventh century.
In the 8th century, some inscriptions were inspected by Colonel James Tod, n inscription was described defeating Manomori, which he found in Chittorgarh, Inscription was thrown by Colonel James Tod throw in the sea.
Like
Like Love Haha Wow Sad Angry
114

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

Close
Close