Religion

नरसिंह और वराह अवतार महोत्सव।

नरसिंह और वराह अवतार महोत्सव।

भारत का एक मात्र ऐसा शहर जहाँ नरसिंह अवतार और वराह अवतार का स्वरुप देखने दुनिया भर से लोग आते है। तीन दिवस का रहता है महोत्सव।

भारत में कोने कोने में इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम, मेले व् महोत्सव मनाये जाते हैं जो भारतीय संस्कृति और इतिहास को उजागर करते हैं। राजस्थान के नागौर जिले में भारतीय संस्कृति की एक झलक हर साल देखने को मिलती है जहां पर हजारों की तादाद में श्रद्धालु इकट्ठे होते हैं। नागौर में पिछले कई पीढ़ियों से नरसिंह और वराह अवतार का उत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाता है। नागौर शहर के मध्य मैं स्थित बंशी वाला मंदिर कई हजारों साल पुराना है। हजारों वर्ष पुराने इस मंदिर का पुख्ता इतिहास अभी तक किसी को नहीं पता मगर इस मंदिर का जीर्णोद्धार करीब 100 साल पुराना बताया जा रहा है, यह जानकारी मंदिर में के शिलालेखों से प्राप्त होती है।

रहस्यमय पातालेश्वर शिव मंदिर।

ज़मीन से करीब 40 फुट की गहराई में शिव लिंग स्वयं उत्पन्न हुई है। इसके पीछे एक दंतकथा यह है कि उस समय यहां पर एक चरागाह हुआ करता था और एक गाय स्वयं ही उस स्थान पर आकर दूध देने लगती थी। चरागाह के मालिक के द्वारा जांच पड़ताल करने पर पता चला के वहां उस स्थान पर कुछ ऐसा चमत्कारिक है जिससे गाय का दूध अपने आप झरने लगता है। गहराई तक खुदाई करने के बाद वहां से शिव लिंग उत्पन्न हुआ। 

शिव लिंग उत्पन्न के कई सैकड़ों साल बाद यहां भगवान कृष्ण, राधा व रुक्मणी जी की मूर्तियां स्थापित की गई मंदिर को बंशी वाला मंदिर नाम से संबोधित किया गया। भारत में ऐसे मंदिर कम है जहां पर कृष्ण भगवान के साथ एक तरफ राधा जी बैठे हैं और दूसरी तरफ रुकमणी जी बैठे हैं और उन मंदिरों में से बंशी वाला मंदिर एक है।

सीताराम जी पुजारी से बातचीत के बाद पता चला कि इनकी 6 पीढ़ियाँ इस मंदिर में सेवा कर रही है। उनकी आने वाली पीढ़ी भी इसी मंदिर से जुड़ी हुई है।

नरसिंह अवतार और वराह अवतार।

हिंदू संस्कृति के मुताबिक मंदिरों में पूरे वर्ष उत्सव मनाए जाते हैं मगर नरसिंह अवतार वराह अवतार का यह उत्सव पूरे भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। मगर नागौर राजस्थान यह पर्व इतिहास में जान डाल देता है।

वैशाख सुदी चतुर्दशी को नरसिंह अवतार का उत्सव मनाया जाता है। संध्या काल के समय भगवान नरसिंह का स्वरूप व्यक्ति-विशेष के द्वारा धारण किया जाता है। बंशी वाला मंदिर में नरसिंह अवतार का उत्सव कई सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। अगले दिवस वैशाख सुदी पूर्णिमा को वराह अवतार भगवान का उत्सव मनाया जाता है। वराह अवतार का उत्सव करीब 50 वर्षों से चला आ रहा है। वराह अवतार का यह महोत्सव राजस्थान में जयपुर में भी मनाया जाता है। नागौर में नरसिंह अवतार और वराह अवतार का एक खास स्वरूप और मन मोहक दृश्य देखने को मिलता है। पुष्करणा समाज के लोग नरसिंह अवतार का रूप धारण करते है। नरसिंह अवतार वराह अवतार रूप धारण करने से पहले मान्यताओं के अनुसार उस व्यक्ति को पर्व से 1 महीने पहले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना पड़ता है। 1 महीने तक व्रत और उपवास किए जाते हैं। नियमित रूप से भगवान की आराधना की जाती है। दूसरे स्थानों पर आवागमन नंगे पैर किया जाता है। उस वक्त पैरों में किसी भी तरह के चप्पल पहनना वर्जित है। नरसिंह अवतार व वराह अवतार पर्व के लिए स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा और हवन किया जाता है बगैर इस विधि विधान के यह उत्सव संभव नहीं है।

वराह अवतार का रूप स्वयं मंदिर के पुजारी 6 पीढ़ियों से धारण करते आ रहे है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहा है।

वैशाख सुदी चतुर्दशी पर पूर्णिमा का यह पर्व मई और जून महीने के अंतराल होता है। भारत के कोने कोने से दर्शनाभिलाषी यहां आते हैं और उत्सव का आनंद लेते हैं। उत्सव करीब तीन दिवस पहले प्रारंभ हो जाता है।

पुराणों के अनुसार हिरण्यकश्यप ने अपने राक्षसी सेनाओं को प्रहलाद की खोज में लग देते हैं। भगवान नारसिंह माणिक्य स्तम्भ को ध्वस्त कर अवतार लेते है और हिरण्यकश्यप का वध करते है। लोग शहर में राक्षसी पोशाक पहनकर प्रहलाद को खोजते है। वैशाख सुदी चतुर्दशी को संध्या के समय भगवान नरसिंह का रूप धारण किया जाता है। वराह भगवन समुद्र में उतर कर हिरण्याक्ष का वध कर भू देवी को मुक्त करवाते है और पृथ्वी को जल में से निकाल लेते है। वैशाख सुदी पूर्णिमा को वराह अवतार का उत्सव मनाया जाता है।

Like
Like Love Haha Wow Sad Angry
Tags

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close